#Kavita by Rajendra Bahuguna

नीरव मोदी,शुशील मोदीऔर विजय माल्या तथा इनके अन्य साडू भाईयोंं ने सिद्ध कर दिया कि हम वास्तव में विश्व गुरू होने वाले हैं।

 

तुम ही भारत के सपने हो

हम को तो आदत है चाेरों  के ऋण  रोज चुकाने की

क्या जरूरत है नीरव  भाई लौट के  भारत आने की

माल्या,मोदी पहले से ही लन्दन में दिन काट रहे है

अपनी ही अरबो  की  माया  अय्यासी से चाट रहे हेैं

भारत  को तो  आदत  है, बीहडों के गीत सुनाने की

क्या जरूरत है  नीरव भाई  लौट के भारत आने की

 

अपना पी.एम.तो परदेशों में  मिलने आता रहता है

सबको लेकर  साथ  चलेगा ह र भाषण में कहता है

ये वशुन्धरा,सुषमा  माता  भी पूरा साथ निभाती है

तुम चोरो के  कारण ही तो  भारत माँ की ख्याति हेै

लालाहित  है  सारी जनता  है तेरे ही दर्शन पाने की

क्या जरूरत  है  नीरव भाई लौट के भारत आने की

 

हूण,मुगल,यवनो ने लूटा,तुम तो फिर भी अपने हो

हम डेढ अरब के कीडे हेैं ,तुम ही भारत के सपने हो

तुम जैसों के कारण दुनिया में भारत की ख्याति हेेै

बे-फिक्र रहोअपने मोदी की छत्तीस इञ्ची छाती है

भारत की तोआदत ही हैे विपरीत स्वरों मे गाने की

क्या जरूरत है  नीरव  भाई लौट के भारत आने की

 

बैकों से ही,सारी सत्ता मिलकर तुम को पाल रही है

चाेरों के मूह में  नगो  का  खून चूस कर डाल रही हेै

जन धन खाता,जीवन बीमा,सब्सीडी खंगाल रही हेै

नोटबन्दी ये जी.एस.टी.भी सरकारो की चाल रही है

क्यों टेन्शन लेते हो ज्यादा  और दिमाग लगाने की

क्या जरूरत  है  नीरव  भाई लौट के भारत आने की

 

इस राजनीति तो तुम जैसे चोरों के कारण जिन्दा हेै

हम सबअन्दर से एक साथ है बस,बाहर से निन्दा हेै

मैं चार साल से जुमले  बाजी से सबको समझाता हूँ

हर राज्य  में  देख रहे हो मैं ही तो सरकार बनाता हूँ

इन कीडों को आदत  पड गयी मेरा साथ निभाने की

क्या जरूरत है  नीरव भाई  लौट  के भारत आने की

 

बैंको को अनुदान दे दिया आओ और अनुबन्ध करो

फिर चुनाव आने वाले है,अब  चन्दे का प्रबन्ध करो

तुम सब के कारण प्रतिपक्षी नेताओं को झेल रहा हूँ

सत्ता के कारणअम्बानी,अडानी के संग खेल रहा हूँ

सारी दुनिया  जान  गयी  है क्या चिन्ता शर्माने की

क्या जरूरत है  नीरव भाई  लौट  के भारत आने की

 

तुम कुबेर ही इस देश  की राजनीति को चला रहे हो

तुम जैसे डाकू भारत  में  आदि काल से कला रहे हो

नेता और व्यवसायी दोनों भारत माँ को जला रहे हो

स्वर्णपक्षी भारत का सोना तपा-तपाकर गला रहे हो

कवि आग की जिद हेै तुम पर एेसी कविता गाने की

क्या जरूरत है  नीरव  भाई  लौट के भारत आने की।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

 

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