#Kavita by Rajendra Bahuguna

क्या प्रभू राम-राज्य ऐसा होता है

क्यों राम तुम्हारे नामो से महिसासुर  सबको काट रहे हैं

अन्ध भक्त नरभक्षी बनकर रूधिर  मांस को चाट रहे हैं

अब राम भक्त मर्यादा  पुरूषोत्म की, मर्यादा बांट रहे है

फिर उपर से साधू-सन्तो  को  ये  भक्त बावरे डांट रहे हैं

 

हे अवध के नन्दन मुझे बताओ  राम राज्य ऐसा होता है

यहां अश्वमेध का रथ लेकर के हर नेता  तुझको ढोता है

क्या प्रभू राम तू इन भक्तों के  जयकारे  से खुश होता है

आज राम अपनी दुर्गति  को देख-देख  कर  क्यों रोता है

 

फिर तेरी इस रामायण में तो जीव हितों के उपदेश भरे हैं

हर  दोहों  में  मानवता के अमुल्य  हृदय के  भाव  खरे हैं

फिर तेरी लीला  काम,क्रोध,मद,लोभ,मोह  से सदा परे हैं

कुत्सित हो कर  सभी  निशाचर  तेरे  नाम से सदा तरे हैं

 

क्या तेरे नाम की सारी शक्ति  आसक्ति  से चूर हो गयी

क्या राजनीति भी तेरे मन्दिर के  चक्कर में क्रूर हो गयी

क्या  तेरी  भक्ति आडम्बर  के भक्तों  में काफूर हो गयी

क्या अब खूनी,कतली भीड़े  तेरे  नामो  से नासूर हो गयी

 

क्यों इन बर्छी,भालों,तलवारों में तेरे नाम की धार लगी है

क्यों  हिन्दू,मुस्लिम  खून खराबे में तेरी ललकार लगी है

क्यों तेरे नाम से राजनीति की ही ये पीढ़ी अवतार लगी है

क्यों यहां अहिसुष्णता के सरंक्षण में पूरी सरकार लगी है

 

ये सत्ता  सब  कुछ देख रही है पर मुँह में आवाज नही है

यहां रामराज्य  की  बातें  तो  है पर कोई  आगाज नही है

यहां बे-ढंगी चित्कारों में भी प्रेम-प्यार स्वर-साज नही है

यहां प्रजातन्त्र  की  सत्ता तो है ,सत्ता जैसा राज नही है

 

प्रभू अगर  कंही  से  देख  रहे हो तो आकर कुछ बोलो ना

अवध के नन्दन इस क्रन्दन पर अपना भी मूँह खोलो ना

फिर इन भक्तों की  औकातों  को भाव तुला पर तोलो ना

कवि आग की विनती है प्रभू इस जन्म-भूमि में डोलो ना।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

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