#Kavita by Rajendra Singh Kunwar Fariyadi

“विकास की हत्या”

 

भाषणों के शोर तले

कुचला गया बार बार

नव विकशित शिशु

जनमानस का प्यार!

अफवाओं के जाल में

नव भारत का विस्तार

उँगलियों पर रखते थे

खुद उँगलियों पर सरकार!

दिया तुम्हें अपना समझकर

यह अलौकिक अधिकार

गला घोट कर प्रतीक्षा करते

ये कैंसी नीति तेरी सरकार!

तुम भी आँख बंद कर

उसी पटल पर जी रहे थे

रक्त बहता रहा जन-जन का

तुम स्वाद लेकर पी रहे थे!

अब हुआ क्या जनाब जवाब दो

आँखों के आँसू नही मांगे हमनें

हर बार विपक्ष उठता था उँगली

इस बार मिलकर उठा दी सबने!  @ – राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’

 

 

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