#Kavita by Rajesh Gupta Badal

-श्रद्धा सुमन —

अटल कल थी थे

आज भी अटल ही हैं।

बसे जन मन में तो

आज भी अटल ही हैं।

सयुक्त राष्ट्र में सर्वप्रथम जिसने

हिन्दी का परचम लहराया

पल पल हर पल जिसने

अडिग हो राष्ट्र धर्म निभाया

आज भी अटल ही हैं।

गा काल के कपाल पर

कविता का मान बड़ाया

वो प्रखर चेतना का धनी जिसने

दुष्टों का शीश झुकाया

आज भी अटल ही हैं।

राजनीति को दिशा दिखा

विश्व को आणविक ताकत दिखलाई

दुष्टों के चक्रव्यूह से निकल जिसने

जन मत का लोह मनवाया

आज भी अटल ही हैं।

पक्ष हो या विपक्ष

सबके जो प्यारे दुलारे हैं

लौकिक परालौकिक हर विपदा से

जिसने अपना नमन करवाया

आज भी अटल ही हैं।

जन्म मरण तो आने जाने है

वो लाल इस बसुधा का जो रार ठाने है।

मृत्यु कहाँ उसको मारगी

जन मन में अमर वो हमारे अटल हैं।

 

राजेश गुप्ता ‘बादल’

मुरैंना म.प्र.(16/08/2018)

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