#Kavita by Rajesh Kumar Singh

फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !

 

माँ की ममता,बाबुल का प्यार,भाई का दुलार दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !

परिवार की गुड़िया,जादू की पुड़िया, सहेलियों की प्रिया दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !!

 

मर्यादा की पहचान,हृदय का अरमान, आन-बान-शान दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !

दया की मूरत,भोली-भाली सूरत,शुभ महूरत दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !!

 

बचपन का सपना,यौवन का गहना,बुढ़ापा का नयना दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !

चरित्र का दर्पण, जीवंत दर्शन, महकता घर-आँगन दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !!

 

चेहरे की मुस्कान, घरवालों की जान,सृष्टि की पहचान दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !

बेटी अद्वितीया,बहन अनन्या और मैं अपनी आराध्या दे ही रहा हूँ फिर दहेज नहीं दे पाऊँगा !!

 

:-राजेश कुमार सिंह

 

67 Total Views 6 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.