#Kavita by Rajesh Kumar Singh

विद्यार्थी जीवन और मेरे गुरुजन

 

 

इस प्रांगण में हम पढ़ न पाते,अगर वो न होते !

जीवन के दो साल यूँ ना बिताते,अगर वो न होते !!

 

 

उनकी छवि थी,सच में निराली !

उनसे जुड़कर ख़ुशी हमने पा ली !!

 

महामानव का दर्शन न पाते,अगर वो न होते !

जीवन के दो साल यूँ ना बिताते,अगर वो न होते !!

 

 

सही मायने में गुरुजी वही थे..!

ग़लत हम भले हों मगर वो सही थे..!!

 

 

अंधेरे में रहते;उजाला न पाते,अगर वो न होते !

जीवन के दो साल यूँ ना बिताते,अगर वो न होते !!

 

 

सूरज जबतक रहेगा गगन में…!

गुरुजी रहेंगे; हमसब के मन में..!!

 

 

सुबह-शाम उनके चरण धो न पाते,अगर वो न होते !

जीवन के दो साल यूँ ना बिताते,अगर वो न होते !!

 

 

उन्होंने मिलाया, हमें आपसब से..!

दोस्त ऐसे पाकर;माँगू क्या रब से..!!

 

 

जीवन के दो साल यूँ ना बिताते,अगर वो न होते !

इस प्रांगण में हम पढ़ न पाते,अगर वो न होते !!

 

 

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