#Kavita by Rajesh Kumar Singh

ग़रीबी और आरक्षण

 

 

हम ग़रीब हैं;हमें संवैधानिक संरक्षण चाहिए।

अब आर्थिक आधार पर ही आरक्षण चाहिए।।

 

 

वर्तमान समय में हम हर जाति में मौजूद हैं।

माँ भारती की संतान हैं;अमीरों का वजूद हैं।।

 

 

हमारे हित में एक फ़ैसला विलक्षण चाहिए।

अब आर्थिक आधार पर ही आरक्षण चाहिए।।

 

 

सत्ता का पर्याय हैं;सहायता से बिल्कुल परे हैं।

लोग चाँद पर हैं;हम उसी दोराहे पर खड़े हैं।।

 

 

बहुत हो चुका यह भक्षण;आत्मरक्षण चाहिए।

अब आर्थिक आधार पर ही आरक्षण चाहिए।।

 

 

अर्थ के अभाव में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

इक्कीसवीं सदी में भी हम;जीवनस्तर से दूर हैं।।

 

 

सरकार द्वारा लक्षित संपूर्ण पर्यवेक्षण चाहिए।

अब आर्थिक आधार पर ही आरक्षण चाहिए।।

 

 

देशवासियों को बाँटने की राजनीति मत कीजिए।

हमारे हिस्से में जो कुछ भी है;हमें सहर्ष दीजिए।।

 

 

सोने की चिड़िया वाला संपूर्ण लक्षण चाहिए।

अब आर्थिक आधार पर ही आरक्षण चाहिए।।

 

 

हम सवा सौ करोड़ से भी अधिक भारतीय हैं।

विविधताओं से भरे देश में हमसभी आत्मीय हैं।।

 

 

हम और आप एकसमान हों;वह क्षण चाहिए।

अब आर्थिक आधार पर ही आरक्षण चाहिए।।

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