#Kavita by Rajesh Kumar Singh

मैं स्वार्थी नहीं !

स्वार्थ तू मजबूर है, अपने पथ पर चलने को

तू चल रहा मनुष्य की, मनुष्यता धूमिल करने को।

एक वक्त  आएगा, जब तू थक जाएगा

तू देखता रह जाएगा, बस देखता रह जाएगा।

तू चल उधर, उस पथ से गुजर

देख अपनी हार को, अपनी कब्र से गुजर

जागी है इंसानियत, हैवानियत को चीर कर।

अंत होने को है तू , किस बात का गुरूर है

अब वक्त तेरा जा रहा, अब तो तू मजबूर है।

 

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