#Kavita by Rajesh Kumar Singh

हम दो  :  हमारे अधिकतम दो

 

 

पुत्र की प्रतीक्षा में जनसंख्या मत बढ़ा लेना।

पढ़ा-लिखाकर पुत्री को ही पुत्र है बना देना।।

 

 

सीता,राधा,लक्ष्मीबाई या फिर लता मंगेशकर !

हर क्षेत्र में बेटियाँ हमारी;बेटों से हैं बेहतर !!

 

 

उपस्थिति दर्ज करवातीं;गृहिणी हो या सेना।

पुत्र की प्रतीक्षा में जनसंख्या मत बढ़ा लेना।।

 

 

स्नेह,संस्कार और मर्यादा की प्रतिमूर्ति है बेटी।

स्त्री शिक्षित होगी तब ही विकसित होगी सृष्टि।।

 

 

‘हम दो : हमारे अधिकतम दो’ का नारा है प्रेरणा।

पुत्र की प्रतीक्षा में जनसंख्या मत बढ़ा लेना।।

 

 

जन्म ही नहीं जीवन भी देना है कर्तव्य हमारा।

अपने हर रूप में स्त्री ही है पुरुषों का सहारा।।

 

 

जन की संख्या नहीं; जन की शिक्षा है गहना।

पुत्र की प्रतीक्षा में जनसंख्या मत बढ़ा लेना।।

 

 

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