#Kavita by Rajesh Kumar Singh

|| ज्ञान का दीप ||
ज्ञान का दीप जलाना है;पढ़ना और पढ़ाना है।
अक्षर की ज्योति से ही जग रोशन कर जाना है।।
मुन्ना पढ़ेगा और मुनिया;बढ़ेगी आगे यह दुनिया।
बनेंगे हमसब केरल-सा;हमलोगों ने प्रण लिया।।
मिलजुलकर इन सपनों को प्यार से सजाना है।
ज्ञान का दीप जलाना है;पढ़ना और पढ़ाना है।।
भारतवाले हैं हमसब; स्वामीजी कहलाते हैं।
सारी दुनिया को हरपल,राह हम दिखलाते हैं।।
आज भी हम विश्वगुरु हैं;विश्वगुरु कहलाना है।
ज्ञान का दीप जलाना है;पढ़ना और पढ़ाना है।।
हम सुधरेंगे जग सुधरेगा; बहुत पुराना नारा है।
सौ फ़ीसदी साक्षरता दर; इरादा यही हमारा है।।
अँगूठे की निशानी को हर घर से भगाना है।
ज्ञान का दीप जलाना है;पढ़ना और पढ़ाना है।।
ज्ञान का दीप जलाना है;पढ़ना और पढ़ाना है।
अक्षर की ज्योति से ही जग रोशन कर जाना है।।

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