#Kavita by Rajesh Kumar Singh

बाल विवाह

 

माँ..मैं अभी शादी नहीं करूँगी,

भाई-बहनों संग मिलकर रहूँगी,

आपका हर एक कहना मानूँगी,

आपके ग़ुस्से को हँसकर सहूँगी,

घर-गृहस्थी की बातें समझूँगी।

माँ..मैं अभी शादी नहीं करूँगी।।

 

 

बापू..मैं अभी शादी नहीं करूँगी,

जो मिलेगा,ख़ुशी-ख़ुशी खा लूँगी,

मनचाहा कपड़ा भी नहीं माँगूँगी,

जीवन में सादगी का रंग भरूँगी,

आपकी पगड़ी नहीं गिरने दूँगी।

बापू..मैं अभी शादी नहीं करूँगी।।

 

 

भैय्या..मैं अभी शादी नहीं करूँगी,

रक्षाबंधन के दिन राखी बाँधूँगी,

आपकी तरह मन लगाकर पढ़ूँगी,

पढ़-लिखकर देश की शान बनूँगी,

मर्यादा में बँधकर ही क़दम रखूँगी।

भैय्या..मैं अभी शादी नहीं करूँगी।।

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