#Kavita by Rajeshwari Joshi

टूटे सपनों

संग ऊँची उड़ान

धैर्य का पक्षी

 

कसमसाती

यादों की गठरियाँ

उधड़ी गाँठे

 

छलकती है

प्यासी अंखिया ज़ोहे

बाट निर्मोही

 

आशाओं साथ

ड़ोर बंधी भविष्य

बिखरा मन

 

सुनी जिंदगी

अन्तहीन डगर

मंजिल ढूँढे

 

सैलाब आँसू

मचलते जज्बात

कोन मनाये

 

टूटे बंधन

आहत भावनाये

करें पुकार

राजेशवरी जोशी आर्द्रा

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