#Kavita by Rajeshwari joshi

दिल  की  मुंडेर  पर  बैठा काग

बुला रहा दे  देकर आवाज

 

आ जाओ. बिछुड़े पल मेरे

इंतजार को कुछ दो विराम

 

देहरी  पर    बैठी    उम्मीदे

नेनो    में   सपने    सजायें

 

सुनी  राहे  बुला  रही तुम्हे

चुपके से  आ जाओ राही

 

सजा रखा यादो  को  तेरी

ह्रदय की तिजोरी  में सजा

 

तक  रही  पनीली अँखियाँ

सजा सिंदूरी  सपने  हजार

 

गया बसंत  बीता  आसाढ़

झूम कर बरसे बरखाबहार

 

ओ   बेदर्दी  ओ.  हरजाई

नींदें  मेरी   तुमने    चुराई

 

कुम्लाई तेरी प्यारी गौरजा

कैसी बंदिशें ओ  हरजाई

राजेशवरी जोशी

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.