#Kavita by Rajeshwari Joshi

कुछ बिखरे बिखरे से
अल्फाज जब एकत्र हुये

कुछ खट्टे कुछ मिट्ठे से
कुछ कड़वे कुछ कसैले

कुछ ने रिश्तो को जोड़ा
तो कुछ तीतर बितर कर गए

कुछ प्यार की चासनी में डुबो गए
कुछ यार से जुदाई दिला गए

कैसे अल्फाजो के मेले थे
जो आप पराये जता गए

थामा था दरकते रिश्तों को
कुछ बवंडर उड़ा कर चले गए

राजेशवरी जोशी

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