#Kavita by Rajeshwari Joshi

दिल से बंधी है डोर जो

मन सबको मिलवाती है

प्यार से भरी गगरी

जो ढुल ढुल जाती है

आँखो से छलका लाड़

दिल छू जाता है

ममता के आंचल में

सब छुप जाता हे

रूप अनेको जब धर लेती

है

दुःख हर लेती है सुख कर देती है

माँ से बढ़ कर कोई नहीं दूजा

सब ये कहते है हाथ जोड़ कर माँ की पूजा करते है

 

राजेशवरी जोशी

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.