#Kavita By Rajeshwari Joshi

साहिल से पुकारा मुझे किसी ने था
वो डूबते हुए सूरज का साया सा था

अचकचा कर चाँद भी झाँका था
मुस्कराकर चांदनी लहराया था

सितारों ने मंदीम मंदीम रोशनी से टिमटिमाहट बिखेरी दी नभ में

जुगनुओ ने उड़ उड़ कर
फिजा मे उधम मचाया था ,

श्यामली चुनरओढ़ बदरिया इठलाई रातरानी मोंगरे की महक से खिलखिलाई

कतरा कतरा होते रुई से फाए थे बादल मिल कर ठंढी बयार संग
गुलाबी से अहसास जगाये थे

शबनमी ओस का पहरा था फुलो पर
किसी विरहणी के पलकों की कोरो से गिरा था |

राजेशवरी जोशी

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