#Kavita By Rajwah gupta Badal

अपनापन
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भीग उठें जो तेरी पलकें
देख किसी के नम नयन
तो ये अपनापन है।
खिलती देख नन्हे अधरों की मुस्कानों को
होता है जो उर आनंदित
तो ये अपनापन है।
फ़िक्रमंद होता तू जब
किसी के लिए बेतहाशा
तो ये तेरा अपनापन है।
जब जब मुस्कुराहटों में भी
खोजता है लेन देन की पारी
तब ये तेरा व्यवसाईपन है।
फिर छलता है जब कातर निगाहों को
दिखा दिखा कर सब्जबाग
तो ये तेरा कमीनापन है।
ग्रसित होती है जब मति
छल कपट भय दंभ से
रहता साथ तेरे तेरा अपना थोथापन है।
झांक रहा जब औरों के गिरेबान में
ये भी तो
मेरा ही ओछापन है।
अब छोड़ो भी बेकार की बातें
मेरा तेरा सांप नेवले सा सही
मगर कुछ तो अपनापन है।
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नाम- राजेश गुप्ता’बादल’
शहर/प्रदेश- मुरैना मध्यप्रदेश
मोबाईल नं. 8290374889

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