#Kavita by Rakesh Dhar Dwivedi

मै कैसे सुन लूँ तुम्हारे मन की बात
मै कैसा सुन लूँ
तुम्हारे मन की बात
रोती माँ का क्रन्दन
अब डराता है
जो सपने हो गए
आखो मे पत्थर
उनको देख कर ये
मन बहुत शरमाता है
मै कैसे चढूँ तुम्हारी
बूलेट ट्रेन पर
बबूआ का गुड्डा रोरोकर
बुलाता है
पास मे शान्त पडी
मिट्टी की बैलगाडी
कुछ दर्द  भरी दास्ता
को सुनाता है
न लोरी है न थपकी है
लूढकी पडी काजल की बत्ती है
बाबादादी  कहानी किसे सुनाए
यहा तो जिन्दगी हो गई विरानी है
आसमा के तारे  रोरोकर
कहते है कि
ये मन की बात सारी आसमानी है
आज इस तथा कथित विकसित दुनिया मे
इन्सान के साथ हुआ ये हादसा अनोखा है
आज तक फूलो की अर्थी पर चढते देखा है
आज फूलो की अर्थी देख कर आया हूँ
विकास की जमीनी हकीकत को देख
मन ही मन बहुत ही शरमाया हूँ
राकेश धर दिवेदी
5
/58 विनीत खण्ड
गोमती नगर
लखनऊ

मो नम्बर- 9910683569

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