#Kavita by Rakesh Yadav, Raj

रोक सकेगा कौन धरा पर,

बढ़ते सूरज का ये तेज।

चपल चाँदनी चँवर डुलाये,

होता अंधकार निस्तेज।।

भारत की यह गौरव गाथा,

गाते सारे वेद पुराण।

वीरो की यह भूमि सदा ही,

देती शहीदो का प्रमाण।।

 

यहाँ कमी नही जयचंदो की,

देते खो अपनी ईमान।

कमी नही है राष्ट्रभक्त की,

पृथ्वी जैसा हो बलवान।।

सदा जूझते समर शत्रु से,

रखते मन में दृढ़ विश्वास।

अपनी कुशल रण कौशल से,

करे सदा शत्रु का नाश।।

 

सदैव ओजस्वी कवियों ने,

खूब बढ़ाये रण उत्साह।

नही कमी गद्दारो की भी,

हल्दीघाटी बनी गवाह।।

स्वाभिमान में राणा जैसा,

भूखे रहकर खाये घास।

डर से जिनके दुश्मन काँपे,

नहिं आते हैं उनके पास।।

 

उनकी गाथा की चर्चा सुन,

पाते दुश्मन भी संताप।

चेतक जैसा चपल अश्व की,

युद्धभूमि मे सुने प्रताप।।

मुगलों का शासक अकबर भी,

डिगा सका नहि जिनका मान।

ऐसे देश भक्त से होता,

अपना भारत देश महान।।  –  राकेश यादव ” राज

287 Total Views 6 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *