#Kavita by Ram Shukla

बाबा बर्फानी के भक्तों का
क्या जीवन लौटा पाओगे
बोलो अब दिल्ली के दरबारों
अब क्या निन्दा रस बरसाओगे या
फिर ताण्डव बन दिखलाओगे
प्रतिपल आहत हो रहा देश
कब तक यूँ गोली खिलवाओगे
क्या बंदिश है तुम पर
हमको भी समझाओगे
या फिर महबूबा की बातों का
अमरप्रेम बरसाओगे
गर सबक नही सिखलाओगे तो
ये सर पर चढ़ते जायेंगे
अब भी यदि न कुछ कर पाओगे
तो सुन लो तुम भी अब दिल्ली पर
न अधिक समय टिक पाओगे …..

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