#Kavita by Raman Bhartiya

सत्य से परहेज क्यूं ?
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तुम्हें दिखता है
गज़नवी , गौरी का आक्रमण
क्यूं नहीं दिखता ?
मनु का उगला हुआ जहर
या
तुम देखना ही नहीं चाहते वह सब ?

दिखता है इतिहास में
मंदिरों का टूटना , मंदिरों में लूटपाट होना
क्यूं नहीं दिखती उन्ही मंदिरों में कैद देवदासी ?
आख़िर क्यूं ?
या जानबूझकर नहीं देखना चाहते उस ओर ?

दिखता है नरक का भय
सडांध मारती व्यवस्था नहीं दिखती
धरती का असल नरक जीवन तुम्हें क्यूं नहीं दिखता ?

बीता हुआ कल तुम कुरेद रहे हो अगर
पलट रहे हो पृष्ठ इतिहास के
तो दर्ज करो अपनी कायरता का पाठ
तो मानू तुम्हें !

वरना
जैसे बिल्ली को सामने देखकर कबूतर आँखें मूंद लेता है
कि वह बच जाऐगा
तुम्हारी स्थिति भी ठीक यही है |

_ रमन भारतीय

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