#Kavita by Raman Bhartiya

जाति

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मेहनत मजदूरी करता हो

या हो बाबू कार्यालय में

कभी डांट में छिपकर

या कभी गाली के रूप में

चटटान से मजबूत

इन हौंसलो को तोड़ जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

नौकरी का साक्षात्कार हो

या हो विद्यालय में दाखिला

विश्वविद्यालय का खेल मैदान हो

या हँसी-ठिठोली वालों का काफिला

गाँव की शांत गलियों और

शहरों के शोर में भी सुन जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

शंबूक सा तपस्वी हो

या हो एकलव्य सा धनुधर

योग्य को अयोग्य साबित करना हो

या अयोग्य को योग्य से ऊपर

सिर धड से अलग करने

अंगूठे काटने के काम आती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

कुँए से पानी भरना हो

या हो गुजरना गली से ले बारात

घोड़ी पर चढने की

या मूछे रखने की हो बात

लाठी-डंडो का डर दिखा

आवाज कहीं दबा दी जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

नई जूती पैर में हो

या हो पगडी सिर पर लाल

इस अपराध पर पीटा जाए

या उतार ली जाए खाल

जाति के जहर की पुड़िया

यहाँ मुफ्त में बांटी जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

राष्ट्र का प्रथम नागरिक हो

या हो मंत्री पद का दावेदार

व्यापार जगत का व्यापारी हो

या पढ़ाई में खूब होशियार

जाति का चश्मा लगाने वालों की

आंखो में यह कांटे सा चुभ जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

बैंक का बडा अफसर हो

या हो डाकू जंगल का

ज्ञान का दीपक हो

या पहलवान हो दंगल का

लाख मना करने पर भी

जाति साथ जोड दी जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

 

न्याय की तलाश में भटकता हो

या हो आत्महत्या को तैयार

जातिय अभिमान से चूर लोगों ने

उजाड़ दिया जब संसार

परिवार को दर-दर भटकने पर

मजबूर यह कर जाती है

पता नहीं कैसे !

नाम से पहले जाति पहुँच जाती है |

_ रमन भारतीय  मोबाईल न• – 9996202128

पता- VPO कारसा डोड , तहसील- निगदू , जिला- करनाल (हरियाणा) (पिन कोड – 132157)

 

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