#Kavita by Ramesh Raj

भारत की उत्तर सीमा पर फिर तुमने ललकारा है

दूर हटो ऐ दुष्ट चीनिओ ! भारतवर्ष हमारा है।

 

हमें न समझो हैं हम कायर, वीरों की सन्तान हैं

मोम नहीं जो पिघल जायेंगे, हम भारी चट्टान हैं

भारत मां की रक्षा करना अब भी ध्येय हमारा है।

 

हम जब तनकर चलते हैं, रस्ते स्वयं निकलते हैं

गोली की बौछारों में हम, हंसते-गाते चलते हैं

अमन-दूत हर भारतवासी, पर अरि को अंगारा हैं ।

 

आओ डटो चीनिओ देखो कितना पानी हम में है

भगतसिंह सुखदेव राजगुरु भरी कहानी हम में है

हमको प्राणों से भी ज्यादा अपना भारत प्यारा है।

 

अपने खूं में राणा वाली अभी रवानी शेष है

वैसे ज्ञान-दान देने वाला ये भारत देश है।

चाहे जैसी आफत आये रामचरन कब हारा है।

+लोककवि रामचरन गुप्त

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