#Kavita by Ramesh Raj

-मुक्तछंद-
।। बलात्कार की शिकार औरत है- कविता।।।
उफ् कितना घिनोना हो गया युगबोध
ठीक एक थानेदार द्वारा
हवालात में बन्द अबला के साथ
बलात्कार की तरह।
चर्चाओं में चिपचिपाता है / एक बलकृत रक्त।

थाने पर अपनी समूची शक्ति के साथ
पथराव कर रही है कविता।
एक प्रत्यक्ष गवाह की तरह
सच्चाई उगल रहे हैं / शब्द।

न्यायकर्त्ता / संविधान के निर्माता / बलात्कारी पुलिस
कहीं न कहीं एक दूसरे से कनेक्ट हैं।

ऐसे में सोचता हूं
क्या हवालात में बन्द औरत के साथ
न्याय हो पायेगा,
जिसने उस लाला के सिर पर
गुलदस्ता दे मारा था
जो कि कल रात
उस औरत की इज्जत लूटने पर आमादा था।

काफी डर लगता है यह सोचते हुए
कि गुनाहों की अशोक वाटिका में कोई नैतिकता
जनतंत्र के कथित रावण को न रिझा रही हो,
या मजबूरीवश
वैश्यावृत्ति पर न उतर आयी हो कोई इमानदारी |

आजकल बड़ा मुश्किल हो गया है
कविता / ईमानदारी और युगबोध का
एक साथ निर्वाह,
जबकि हवालात में एक बलात्कार की शिकार
औरत है- कविता।
-रमेशराज

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