#Kavita by Ramesh Raj

कवि रमेशराज के पिता स्व. श्री ‘लोक कवि रामचरन गुप्त’ का एक चर्चित ‘लोकगीत’…………

जागौ-जागौ रे भारत की वीर जवान, विदेशी लूटें भारत कूं।

पापी पाकिस्तान लिये नापाक इरादे घूमि रह्यौ

काश्मीर को राग अलापै, अहंकार में झूमि रह्यौ

ऐ रे काटौ-काटौ रे कुकर्मी के अब कान, विदेशी लूटें भारत कूं।

राणा के भाले, चौहानी तीर कमानें ले आयौ

धरि कें धीर वीर तुम अरि कूं अपने जौहर दिखलायौ

ऐ रे लायौ मुश्किल से आजादी हिन्दुस्तान, विदेशी लूटें भारत कूं।

ऐसे तैसे देश बचायौ हमने भइया गोरन ते

अब रक्षा करनी है सबकूं अपने घर के चोरन ते

ऐ रे इन जयचंदों से बचि कें रहियौ चौहान, विदेशी लूटें भारत कूं।

 

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