#Kavita by Ramesh Raj

।। स्वागत ऐसे नये साल का ।।
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दूर करे आकर अंधियारा
जिसमें तूफां बने किनारा
मिल जाता हो जिसमें उत्तर
हर टेड़े-मेड़े सवाल का
स्वागत ऐसे नये साल का।

जो आकर छल को दुत्कारे
सत्य देख उसको पुचकारे
जिसमें फूल-फूल खिलता हो
टहनी-टहनी, डाल-डाल का
स्वागत ऐसा नये साल का।

घृणा द्वेश से दूर रहे जो
मीठी-मीठी बात कहे जो
जिसमें प्यार पनप जाता हो
लोगों में बेहद कमाल का,
स्वागत ऐसे नये साल का।

जिसमें श्रम पूजा जाता हो
मेहनतकश झट मुस्काता हो
जहाँ पसीना बन जाता हो
सोना तपते हुए भाल का,
स्वागत ऐसे नये साल का।
-रमेशराज

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