#Kavita by Rameshwari Nadan

रिश्ते

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कांच के रिश्ते दुनिया करे सलाम

अपने ही अपनो को करते बदनाम

 

रिश्तो के भवर से कैसे निकल पाये

कातिल बने आज अपने और पराये

 

झुठे रिश्तो की चादर तू न ओढ

खोखला कर देंगे  हो जायेगा कोढ

 

रिश्ते कुछ बोलते कुछ खडे मौन

सच्चा झूठा रिश्ता बतलाये  कौन

 

रिश्तो का सजता रोज ही बाजार

खरीद लो रिश्ते कीमत है प्यार

 

अपने परायो का राग न अलापो

रिश्तो  को समझो नींद से जागो

 

दिल के दरवाजों को खोलो

रिश्तों को पैसों से न तोलो

 

समझदारों की भीड़ में ये नादान

रिश्तों का बनाये रखना सम्मान

रामेश्वरी ‘नादान ‘

 

 

 

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