#Kavita by Rameshwari Nadan

मैं हिंदी हूँ

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अपने ही घर में

डरी सहमी सी हूँ

अपनों में ही

बेगानी सी हूँ

बह रहा नीर आँखों से

मैं व्याकुल हूँ

मैं हिंदी हूँ

मैं हिंदी हूँ

 

पूछ रही हूँ

अपना ही पता

मैं घर से हुई

आज लापता

बच्चे मेरे भूले मुझे

मैं हैरान हूँ

मैं परेशान हूँ

मैं हिंदी हूँ

मैं हिंदी हूँ

 

मत मनाओ हिंदी दिवस

एक दिन की खुशी

साल भर तो रहना

मुझे है दुखी

मैं कँहा सम्मानित हूँ

मैं हिंदी हूँ

मैं हिंदी हूँ

 

गर्वित अब होते नहीं

मेरे अपने मुझपर

अंग्रेजी का चोला पहन

इतराते मेरे ही घर पर

सुन लो मेरे बच्चों जरा

मैं भारत माँ की

आज भी बिंदी हूँ

मैं हिंदी हूँ

मैं हिंदी हूँ

रामेश्वरी नादान

One thought on “#Kavita by Rameshwari Nadan

  • September 14, 2018 at 1:33 pm
    Permalink

    Bahut sunder rachna nadan ji

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