#Kavita by Rameshwari Nadan

हैवान मुखौटा पहनकर

संत बना टी.बी अखबारों में

बिक गयी इंसानियत

शहर के बाजारों में

 

चकनाचूर हुआ विश्वास

हैवान दिखते अंधियारो में

लूट रही नारी आज

अपने ही गलियारों में

बिक गयी इंसानियत

शहर के बाजारों में

 

भरकर आँसू नैनों में

बिक गयी वो मयखानों में

हवस के भेड़िये हर तरफ

कब तक छुपे तहखानों में

 

नोंचा जिस्म करी हत्या

इंसानियत मिट गयी हत्यारों में

बिक गयी इंसानियत

शहर के बाजारों में

रामेश्वरी( नादान )

 

 

One thought on “#Kavita by Rameshwari Nadan

  • April 20, 2018 at 7:35 am
    Permalink

    True lines

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