#Kavita by Rameshwari Nadan

आभास (शीर्षक पर मेरी रचना )

—————————————-पटल पर सीधा

बैड  पर पीड़ा से छटपटा रही थी वो

फिर भी दिल में खुशी का आभास था

पीड़ा जैसे -जैसे  चरम पर पहुँची

खुशी का आभास भी बढ़ने लगा

आचनक तेज पीड़ा से राहत मिली

आभास अब बदल चुका था हकीकत में

नन्हीं सी जान को देखते ही

पीड़ा के निशान मिट गए थे

वो नया जन्म लेकर आज

औरत से माँ बन गई थी

वो जो कभी नटखट बेटी थी

आज समझदार माँ बनकर

गोद में ले नन्ही जान को

ममत्व का आनन्द ले रही थी

न था पीड़ा का आभास भी अब

न था पीड़ा का आभास भी अब

नादान

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