#Kavita by Ramji Prasad Bhairav

दुनियाँ (कविता )

 

सुना है

यह दुनियाँ

बहुत बड़ी है

इत्ती बड़ी, इत्ती बड़ी, इत्ती बड़ी

नहीँ सबसे बड़ी

इसमें ही सब कुछ

समाया हुआ है

और समाया हुआ है

इस बड़ी दुनियाँ में

एक छोटी दुनियाँ

उस छोटी दुनियाँ

के भी अंदर

एक छोटी दुनियाँ है

इसी प्रकार छोटी दुनियाँ

के अंदर एक और दुनियाँ

ऐसे ही जाने कितने

दुनियाँ गढ़ लिए हैं

आदमी ने

अपनी प्रभुता के लिए

जहाँ का वह स्वयं भू शासक है

और आदमी

इसी भ्रम व अहंकार में

जी रहा है कि

वह दुनियाँ का

श्रेष्ठ व्यक्ति है।

 

रामजी प्रसाद ” भैरव ”

चहनियाँ चन्दौली

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