#Kavita by Ramji Prasad Bhairav

नदी (कविता)

 

नदी !

तुम इस बात से

आश्वस्त कभी मत होना

कि तुम्हारे तट पर खड़ा

हर कोई व्यक्ति

श्रद्धालु ही होगा

वह तमाशाई हो सकता है

या फिर कोई

उत्श्रृंखल लम्पट भी

हो सकता है

वह तुम्हारे

शांत जल में

पत्थर का एक टुकड़ा फेंककर

उपहासात्मक ढंग से

गिन सकता है

तुम्हारे जीवन में

आये हलचल को ।

 

रामजी प्रसाद ” भैरव ”

चहनियाँ चन्दौली

9415979773

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