#Kavita by Reeta Jaihind Arora

हिये  – श्रंगार  रस   –  मात्रा  12.     10.    .12

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अब जल्दी घर आना

मुझ संग  साजन अब

तुम प्रीति  निभा जाना

 

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सुरज से चमक जाओ

आओ प्रीतम अब

अँधकार मिटा  जाओ

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ये चाँद निकल आया

तुम  जैसा  बिल्कुल

है साजन घर आया

 

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जीवन साकार हुआ

देखा जो साजन

रौशन संसारा  हुआ

 

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ख्वाबों में रहते थे

सपने सच्चे हुए

जो हमने   देखे थे

 

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वर्षों  तक निभायेंगे

प्यार वफा वादे

सब सच कर जायेंगे

 

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तुम गीत पुराने हो

जीवन बगिया के

मनमीत सुहाने हो

 

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प्यासा ये सावन सा

जीवन  मेरा है

बरसो मनभावन सा

 

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