#Kavita By Reetu Devi

तेरे प्रेम में रंग गयी

मैं तो तेरे प्रेम में रंग गयी रे साजना ,
प्रीत की रीत चला खनकायी रे कंगना।
तारे गीन-गीन कटने लगी रात सुहानी,
तेरे प्रेम भरी पिचकारी से भींगी मैं दीवानी।
मैं तो तेरे प्रेम में रंग गयी रे साजना,
तेरी मूर्ति दिल में बसा हो गयी बावरी रे मनभावना।
रंगों की वर्षा में दिव्य प्रेम पा प्यास बुझाती प्रियतम,
प्रेम रंग अंतर्मन से अब नहीं हटेगी प्यारे सनम।
मैं तो तेरे प्रेम में रंग गयी रे साजना,
सुधबुध अब न वश में रहा रे राँझना ।
धीरे-धीरे छाने लगा तन,मन प्यार नशा,
मुख प्रस्फुटित होने लगा अलौकिक प्रेम भाषा।
मैं तो तेरे प्रेम में रंग गयी रे साजना
रीतु देवी
दरभंगा, बिहार

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