#Kavita by Rifat Shaheen

बहुत सी बातें हैं तुमसे करनी

कभी तो आओ क़रीब बैठो

सुनाऊँ कुछ मैं शब के किस्से

बताऊं कुछ मैं सहर की बातें

कुछ लम्हे दोपहर के

भी रक्खूं सामने मैं

फिर ,तुम्हीं से कह दूं

ये क़र्ज़ मेरे हैं तुम्हीं पर

बताओ कब ये अदा करोगे

न कर सको तो..

बस इतना कह दो,

हटाओ ये ज़िन्दगी के झगड़े

चलों कहीं पर सुकूँ से बैठे

वफ़ा की  हो एक रबाब

और हम ,मुहब्बतों का ही राग छेड़ें

बस इतना कह दो तो, माफ कर दूं

जला दु कर्ज़ों की सब ब्याज़े

तुम इतना कह दो, हां ,इतना कह कर ज़रा तो देखो

 

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