#Kavita by Rifat Shaheen

 

टुटा तारा जीवन मेरा चाँद कहाँ से लाऊँ रे

मेरा दामन छोड़ दे राही मैं इक भटकी छांव रे

पग में कांटे आँख में पानी

न साथी न सपना है

जग बैरी है अँधियारा है

कोई नही अब अपना है

थक जायेंगे चलते चलते

कोमल तेरे पांव रे

मेरा दामन छोड़ ….

आस का मोती टूट गया है

आंसू बस है नैनन में

एक कली भी पास नही है

कांटे बस है दामन में

दर्द की देहरी पर करे जो

आये मेरे गाँव रे

मेरा दामन छोड़…..

कोयलिया की कूह कूह में

मेरा दर्द समाया है

पपिहे की पीहू पीहू में

अंतर्मन की पीड़ा है

ऐसे में ऐ सखियों बोलो

गीत मैं कैसे गाउँ रे

मेरा दामन छोड़…..

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