#Kavita by Rifat Shaheen

एक रोज़ मेरी अपनी बीवी ने ये कहा

तुमने मुझे कभी लव लेटर नही लिखा

अब जा रही हूँ मैके तब तक न आऊंगी

जब तक तेरे लव लेटर का तोहफ़ा न पाऊँगी

हैरान हो गया मैं सुन कर के उसकी बात

लिख्खू उसे लव लेटर अब ऐसे नही हालात

अब तक तो चार बच्चों का मैं हो गया था बाप

न थी नई उमंगे न था नया शबाब

अब तो मुझे थी फ़िक्र बस आटे दाल की

खिचड़ी सी हालात हो गई थी मेरे बाल की

ऐसे में मेरी बीवी ने क्या बचपना किया

मेरे लिये खड़ा ये नया मसअला किया

मैं सोचता रहा और वो चली गई

मुझको अजीब कशमकश में फंसा गई

इस बीच लेटर लिखने की कोशिश तो बहुत की

लेकिन ये बात शायद मेरे बस की नही थी

फिर एक दिन ये आइडिया आया दिमाग़ में

हौले से मुस्कुरा उठा मैं अपने आप में

लिखा उसे जो लेटर वो पोस्ट कर दिया

और उसको उसके मायके में होस्ट कर दिया

लिखा उसे की तुम तो नही आईं जानेमन

मैं था अकेला घर में न लगता था मेरा मन

अपने अकेलेपन को मैंने दूर कर लिया

अब दूसरा निकाह ही मंजूर कर लिया

तरकीब मेरी जल्द ही काम आ गई

बेगम हमारी लौट के नाकाम आ गई

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