#Kavita by Rifat Shaheen

मुझे अच्छा लगता है जब तुम भरी भीड़ में मेरा हाँथ थाम लेते हो

और कहते हो

साथ साथ चलो न

मुझे अच्छा लगता है, जब तुम मेरी तरफ देख कर कहते हो

थक तो नही गई

और मेरा बोझ ख़ुद उठा लेते हो

मुझे अच्छा लगता है जब मेरी तरफ उठती नज़रों को तुम नागवारी से देखते हुए मुझे अपने हिसार में ले लेते हो

और कहते हो चलो यहाँ से

मुझे अच्छा लगता है

जब तुम कहते हो ,मैं हूँ न

मुझे अच्छा लगता है जब मेरे सोये बदन पर कंबल डालते हुए कहते हो

लापरवाह हो तुम,ठण्ड लग जाएगी

मुझे अच्छा लगता है जब तुम कहते हो

मेरे साथ चलो,देखो अकेले मत जाना

मुझे अच्छा लगता है, जब तुम कहते हो

दुपटटा तो ओढो

मुझे अच्छा लगता है, जब तुम कहते हो चलो जल्दी सो जाओ

मुझे अच्छा लगता है, जब तुम कहते हो

मेरे साथ ही खाओ

मुझे अच्छा लगता है, जब तुम इतनी सारी बंदिशें लगाते हो

और कहते हो

तुम सिर्फ मेरी हो

बंदिशें भी प्यारी होती है

बशर्ते उसमे मुहब्बत और क़ुरबानी हो

गुलामी नही…..

 

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