#Kavita by Rifat Shaheen

मुझे धड़कनों में तलाश कर

तेरी धड़कनों में ही हूँ कही

जो वहां नही तो कहीं नही

तू ये याद रख मेरे हमनवां

मुझे ढूंढने की जो चाह है

तो क्यों ढूंढते हो यहाँ वहाँ

मैं यूँ जा बजा तो गई नही

मेरे हमसफ़र है तेरी क़सम

मैं किसी जगह भी रुकी नही

किसी ठौर भी तो रुकी नही

मुझे धड़कनों में तलाश कर……

तेरी जुस्तज में घिरी रही,

तेरी आरज़ू में घुली रही

तेरे ज़ुल्म जब्र भी पी गई

मैं तो आंसुओ में थमी रही

मुझे धड़कनों में तलाश कर……..

तेरे कुर्ब की ही तलाश है

तेरे लम्स की ही तो प्यास है

तू मिला तो शमआ पिघल गई

तेरी आंच दिल में उतर गई

मुझे धड़कनों में तलाश कर……….

तेरे बाज़ुओं में खिली रही

तेरी खुश्बुओं में बसी रही

तेरे साथ ही तो है ज़िन्दगी

तू ही ज़िन्दगी मेरी ज़िंदगी

मुझे धड़कनों में तलाश कर

तेरी धड़कनों में ही हूँ कहीं

जो वहां नही तो कहीं नही

तू ये याद रख मेरे हमनवां

 

रिफ़अत शाहीन

136 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *