#Kavita by Rishabh Dev Sahu

 

हे वीर तेरी वंदना का छंद बनना है मुझे ।

हे सुमन तेरे मकरन्दो का मधुरस बनना है मुझे ।

हे सोना तेरे रंगो का रंग बनना है मुझे ।

हे काव्य तेरे कल्पनाओ का सृजन करना है मुझे

हे देश तेरे प्रेम का देश प्रेमी बनना है मुझे।

हे सैनिक तेरे अपमान का बदला लेंना है मुझे।

इस मातृ भूमी  कि रक्षा हेतु शस्त्र बनना है मुझे ।✍

आपका

ऋषभदेव

523 Total Views 9 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.