#Kavita by Rishabh Tomar Radhe

दर्द तुमको बताओ मैं कैसे,

किस तरफ कट रही सर्दियां है

रात भर जगाना चीखना है,

मेरी जाँ तुमसे ये दूरियाँ है

 

आज मौसम है कोहरा घना है,

सर्द रातो का ये सिलसिला है

अब बताऊँ सनम तुमको कैसे,

बिन तुम्हारे यहाँ सिसकियाँ है

 

लब ये खामोश अब हो हुये है

दर्द का आँखो से आकर बहा

प्यार भी  दर्द भी तल्खियां है,

अब तुम्हारे बिना सर्दियां है

 

चाँद खामोश बैठा है छत पर

और दिल ये मेरा गमजदा है

अब बताऊँ ये तुमको मैं कैसे

शहर में आज कल शादियाँ है

 

वो गुलाबी कली मुझसे रूठी

कह रही तुमसे कुछ न हुआ है

अब बताऊँ मैं उसको ये कैसे

मेहँगी हो गई साड़ियाँ  है

 

वो पुराने जमाने की बातें

आज कल याद आने लगी है

तुम मेरी बाहों में साथिया हो

चाँदनी रात में सर्दियाँ है

 

बिना तुम्हारे गुजरता न दिन है

रात में पड़ रही सर्दियाँ है

मैं तुम्हारे बिना गमजदा हूँ

और गुम ये तेरी चूड़ियाँ है

 

मैं कहाँ तुम कहाँ साथिया हो

बिन तुम्हारे यहाँ सिसकियाँ

होठ खामोश से हो गये है

बिन तुम्हारे नही इश्क़िया है

 

दर्द का आज ये सिलसिला है

हर कोई गम में डूबा यहाँ है

चाँदनी रात आग़ोश में है

छा गई पर यहाँ बदलियाँ

 

देखकर के तुम्हे क्या बताये

आँख में जाने क्या हो छुपाये

फूल है डाल है तितिलियाँ है

और आँखो में ये मस्तियाँ है

 

राजमहलों की बातों को छोड़ो

मेरे दिल में जरा सा तो रह लो

सर्द है मर्ज है मेरे दिल में

और बची बिन तेरे सिसकियाँ है

 

छा रही ये घटा आसमाँ पर

आसमाँ सा मेरा हाल राधे

वो मिली आके इस आसमाँ से

कोधती तब से ये बिजलियां है

 

तुम मेरे पास बैठी हुई थी

भूलता वो नही बकिया है

अब बताऊँ में तुमको ये कैसे

जल रही हमसे ये लड़कियां है

 

तुम भले ही नही पास मेरे

पास मेरे तेरी मस्तियाँ है

तुम उदासी की चादर न ओढ़ो

तेरी तस्वीर पर उंगलियाँ है

 

आज कल बढ़ गई सर्दियाँ है

हो रही हर तरफ शादियां है

 

ऋषभ तोमर

 

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