#Kavita by Roopesh Jain

लोगों का क्या है

लोगों का क्या है समझते कम हैं

बिना जरुरत समझाते ज्यादा हैं

समय पर काम आने से कतराते हैं

सलाह मुफ़्त है बिन मांगे दे जाते हैं

सुनते रहो ऊल जलूल तो ठीक

कुछ कहो तो बुरा मान जाते हैं

दूसरे के कष्ट में आता है मजा

भला चाहने का ढोंग कर जाते हैं

कोशिश करता हैं कोई सुलझाने की

बेवजह आकर चीजें उलझाते हैं

लोगों का क्या है…..

डॉ रूपेश जैन ‘राहत’

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