#Kavita by Roshan Chitranjan & Mamta Khandelwal

सुनिये कविता,

 

अम्बर से मोती गिरे

तेरे नयन है झील

बुन्द बुन्द घरा भरे

जैसे तेरे बिंदी नील

 

है क्यों उदास तू

जैसे पंछी प्यासा

कर काम कुछ ऐसा

ज़िससे दूनियाँ देखे तमाशा

 

जल जाये दुष्मन भी

तुम्हारी कामयाबी देख कर

चेहरे की हसी कभी कम ना हो

दिखा दो दूनियाँ को चिराग बन कर

 

तुम गंगा की नीर हो

तुम प्रेम की पीर हो

तुम शाश्वत हो

तुम मेरे आंगन की तुलसी हो

 

“रोशन ” साथ देगा तुम्हारा हर मोड़ पर

तुम खुद मेरी “कविता ” हो

तैयार हो जाओ शब्द बन कर

तुम शब्द की छन्द हो

 

रोशन “चित्तरंजन/ममता खण्डेलवाल ”

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.