#Kavita by Roshan Sharms

करू मैं बन्दन आपको
आप मुझे ऐसे बनाया
एक कुम्हार की तरह
ठोक बजाकर अपना शिष्य बनाया …..
करू मैं ………………….

हमेशा शिश झुकाता हूँ
आपके चरणो का मैं प्यासा हूँ
करू मैं बार बार नमन आपको
आपने मुझे अपने ह्रीदय से लगाया
करू मैं ………………………….

क्या था पढना -लिखना हैं आपने सिखाया
शिष्टाचार हैं क्या आपने बतलाया
गुरू हैं आप मेरे
शिश नबाने आया हूँ ……….
करू मैं …………………..

मैं माटी का मुरत हूँ
आपने एक इंसान बनायें हैं
आप सदा पूजनिय हैं मेरे लिये
आपने ही ज़ग दिखलाया हैं …
करू मैं ……………………………

रोशन “चित्तरंजन /ममता खण्डेलवाल “

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