#Kavita by S B S Yadvesh

जय मानव !                        जय विज्ञान !

तुम वही तो हो ?

तुम वही तो हो ?

जो कहते थे !

पृथ्वी ही ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु है

पृथ्वी अचल है अटल है

पृथ्वी के चारों ओर सूर्य लगाता है चक्कर ?

किन्तु

निकोलस कोपरनिकस का चेला

खगोलविद एवं गणितज्ञ

जियार्दानो  ब्रूनों

जैसे ही यह बताया ?

धर्म में भूचाल आया

कि

ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु पृथ्वी नहीं ! बल्कि सूर्य है

एक ही पृथ्वी नही

हैं अनेकों पृथ्वियाँ

एक ही सूरज नहीं

अरबों सूरज धधकियाँ

सिर्फ यह आकाश है इतना नही ?

जितना सब हम देखते !

इस अनन्तो  आकाश में

है अनन्तो विश्व  हैं अनन्तो धरतियाँ

 

तुम वही हो ?

जिसकी समझ में कुछ नहीं आया

तुमने इनको कैद करवाया

सलाखों के पीछे भिजवाया

भूख-प्यास से तड़पाया

कठोर यातनायें दिलवाया

इस पर भी संतुष्टि नहीं मिली

तो जियार्दानों बूनों को जिन्दहि जलवाया

खता बस इतनी थी

उन्होंने सच बताया

सच बताने का ये इनाम पाया  ?

 

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