#Kavita by Salil Saroj

आप खेतों में शौक से बारूद बोएँ,

हम तो अपने आँगन में तुलसी लगाएँ।

आप खुद जागे,औरों को भी जगाएँ,

हम तो दिन के बिस्तर में रात उगाएँ।

आप माहिर है,सो बँटवारा जरूर करें,

हम तो गंगा की धारा को जमुना से मिलवाएँ।

मुर्दा शहर,मुर्दा नगर,मुर्दा ही है हर बस्ती,

हम तो श्मशानों में भी जीवन का फूल खिलाएँ।

आपका घर चलता होगा लाशों के सौदे से,

हम तो यमराज से भी लड़कर जीवनदान दिलाएँ।

सलिल सरोज

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