#Kavita by Sandeep Yadav WP

रिपु मान सिंह गज मस्तक पर चेतक दो पैरो खड़ा हुआ,,

राणा करते थे वार अश्व निर्भय निश्छल था अड़ा हुआ,,

छड़ भर मे दिया दिखाई गज चालक सिर भूपर पड़ा हुआ,,

अरू मान झुका था हौदे मे बच गया अचम्भा बड़ा हुआ,,

उठते ही किया प्रहार किन्तु असफल हो गया निशाना था,,

संगठन शक्ति का मंत्र फूँक बुझता दीपक उकसाना था,,

राणा प्रताप का मुख्य ध्येय आजादी वापस लाना था,,

 

तलवार चहुँदिस कोसो तक थी चमक रही जैसे बिजली,,

रूंडो मुंडो के ढेर लगे रण में इस तरह कटार चली,,

खूब राजपूत करते प्रहार आगे था पर्वत अरावली,,

मुगलो की सेना बीहड़ मे जाती थी तब तक भूल गली,,

राणा के कुशल सैसिको को मालूम सब ठौर ठिकाना था,,

संगठन शक्ति का मंत्र फूँक बुझता दीपक उकसाना था,,

राणा प्रताप का मुख्य ध्येय आजादी वापस लाना था,,

 

सॉगो की कहीं लडाई थी था समर कही तलवारो का,,

असि भाला बर्छी तेग तवर धनु बाण कटार दुधारो का,,

चलती थी गोली कही कही था दृश्य तोप की मारो का,,

कर रहा प्रचालन उभय पक्ष चुन चुन अच्छे हथियारो का,,

सबने संधाना वही शस्त्र जिस पर विस्वास पुराना था,,

संगठन शक्ति का मंत्र फूँक बुझता दीपक उकसाना था,,

राणा प्रताप का मुख्य ध्येय आजादी वापस लाना था,,

हास्य कवि संदीप शरारती रायबरेली

 

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