#Kavita by Sangeeta Nag Suman

आज बच्चे तरस रहें है

गिल्ली के मैदानों को।

बचपन के सब खेल निराले

छूटे सब सात सितोलिये।

इंद्रधनुषी रंगो का

कहा गया वो छुप्पक

छई।

नदी पहाड़ के वो सरगम

कहा  गये वो गीत पुराने।

मन्दिर की  घण्टी सुन

दौड़े छोटे मोटे बाल गोपाला

हरी प्रसाद का संगम मैला

कहा गया वो रसमय  आनन्द।

घर आँगन की प्यारी बाला

डरती रही बाहर ज्वाला।

अब मुस्कुराहट वो हँसी

ठिठोली मन्द हो गयी

आते आते।

बच्चे का बचपन अब छिना

आधुनिक विज्ञानं ने ।

जहरीले ये नाग कुचल दो

बचपन हमको वापस दे दो।

🙏संगीता नाग🙏

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.