#Kavita by Sangeeta Nag Suman

हर लड़की को सावन के महीने में अपने मायके की जरूर आती है।

 

उसे अपनी सखियाँ

और दादुर मोर पपीहा

सबकी आवाज याद

जरूर आती होगी।

 

आँगन में नीम पर  बंधा   झूला और पवन के मदमस्त करने वाले झोके

गीतो की मधुर तान

मल्हार और कजरी

के साथ मस्त कर

देने वाले लोकगीत

बहुत याद आते होंगे।

 

आज हम सावन में

बारिस के आते ही छज्जे पर सुख रहे कपड़े

अंदर ले आते है।

 

अब कोई नही  भींजता बरसात में न झूले न ककड़ी भुट्टा वाला घेहरा

न फूंदी फटाका

जिया मेरा काका

नही मिलते ये  खेल अब

 

हम बचपन से दूर हो

गये या बचपन छीन

लिया आधुनिकता ने क्या

सच है ।

 

पर आज भी हरियाली अमावस होते ही हर बेटी

अपने मायके जाने की

प्रतीक्षा  करती है।

 

पेड़ कितना ही फलदार

हो जाये उसे जड़ याद

आती है।

बस यही हमारा भी हाल

है भाई की कलाई पर बड़ी सी सबसे सुन्दर

रेशम की डोर ले  रही बहन

कहती है मुझे बहुत याद आती है मायके की।

 

🙏संगीता नाग

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