#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

अपनी ही दुनिया मे मस्त है

हम तो भीम के भक्त है.

 

उठ रही हर तरफ से सदा

बदल रहे ताजो तख्त है.

 

खत्म हो गई राजे शाही

बदला गूलामो का वक्त है.

 

अछूत हमे कहने वालो

सबका लाल ही रक्त है.

 

चमक रहा दुनिया मे नाम

हम दलित नही फक्त है.

 

जो हमारा है वो हम तक आयेगा

हक के लिये हम सख्त है.

 

मेहनत रन्ग जरूर लाती है

झूकती फलो से दरख्त है.

 

जन्ग..जन्ग लगे विचारो से है

बात वतन की हो तो सरपरस्त है.

 

जात धरम मस्तक पर नही लिखा

तो फिर क्यू विवाद जबरदस्त है.

 

नफरत मे कुछ नही रखा “अश्क”

जो प्रेम से जिये वो ही मस्त है.

 

संजय अश्क बालाघाटी

9753633830

 

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